सब्सिडी वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए ई-बिल प्रणाली की शुरुआत
केंद्र सरकार ने किसानों को दी जाने वाली रासायनिक खाद की सब्सिडी के वितरण में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए ‘ई-बिल प्रणाली’ (E-Bill System) को मंजूरी दी है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य खाद सब्सिडी के वितरण में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। दरअसल, साल २०१० से लागू एनबीएस (NBS) योजना के तहत सरकार खाद कंपनियों को भारी मात्रा में सब्सिडी देती है ताकि किसानों को स्थिर और सस्ती दरों पर खाद मिल सके। पुरानी ऑफलाइन प्रक्रिया में बिलों के निपटान में काफी समय लगता था और फर्जी रसीदों के जरिए सब्सिडी हड़पने की शिकायतें भी सामने आती थीं। अब नई ई-बिल प्रणाली के माध्यम से हर खरीदे गए बैग का रिकॉर्ड ऑनलाइन होगा, जिससे सरकार यह जान सकेगी कि किस किसान ने कौन सी खाद खरीदी और उस पर संबंधित कंपनी को कितनी सब्सिडी देनी है।
क्या किसानों के बैंक खाते में सीधे जमा होगा सब्सिडी का पैसा?
अक्सर किसानों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या खाद की सब्सिडी डीबीटी (DBT) के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में आएगी। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सब्सिडी का पैसा सीधे किसानों के खाते में नहीं भेजा जाएगा। इसके पीछे का मुख्य कारण खाद की बाजार में अत्यधिक ऊंची कीमतें हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी खाद के बैग की वास्तविक कीमत ३००० रुपये है और सरकार उस पर १५०० रुपये की सब्सिडी देती है, तो वर्तमान में किसान को केवल १५०० रुपये ही चुकाने पड़ते हैं। यदि सब्सिडी सीधे खाते में देने की व्यवस्था की गई, तो किसान को पहले ३००० रुपये की पूरी रकम चुकानी होगी और फिर बिल अपलोड करने के बाद सब्सिडी का इंतजार करना होगा। यह आर्थिक रूप से छोटे किसानों के लिए संभव नहीं है, इसीलिए सब्सिडी पूर्ववत खाद कंपनियों को ही दी जाएगी, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और तेज होगी।















