मानसून 2026: अल-नीनो बनने की संभावना से चिंता
स्काईमेट वेदर के ताजा अनुमान के अनुसार, साल 2026 के मानसून पर ‘अल-नीनो’ (El-Nino) का प्रभाव देखने को मिल सकता है। वर्तमान में ‘ला-नीना’ की स्थिति बनी हुई है, जो मार्च तक न्यूट्रल होने की उम्मीद है। हालांकि, मई-जून के आसपास समुद्री सतह का तापमान बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे ‘इवॉल्विंग अल-नीनो’ की स्थिति बन सकती है। ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि जब अल-नीनो बन रहा होता है, तो वह मानसून की बारिश को कम करने में बड़ी भूमिका निभाता है। हालांकि, मानसून के सटीक प्रभाव का पता मार्च-अप्रैल के बाद ही चलेगा, लेकिन शुरुआती संकेत मानसून के लिए थोड़े चिंताजनक नजर आ रहे हैं।
उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी और शीतलहर का कहर
उत्तर भारत के राज्यों में ठंड का प्रकोप और बढ़ने वाला है। पश्चिमी विक्षोभ के हटने के बाद अब उत्तर-पश्चिमी बर्फीली हवाएं मैदानी इलाकों में पहुंच रही हैं। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले दो-तीन दिनों के दौरान तापमान में 2 से 3 डिग्री की और गिरावट आने की संभावना है। राजस्थान के कई हिस्सों में पाला (Ground Frost) पड़ रहा है, जबकि पंजाब और हरियाणा में शीतलहर (Cold Wave) का अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली में भी न्यूनतम तापमान 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरने के आसार हैं, जिससे ठिठुरन काफी बढ़ जाएगी।















